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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर साउथ इंडियन थीम में सजा


शहर 06 May 2026
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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर साउथ इंडियन थीम में सजा

मुंबई 06 मई: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के पावन अवसर पर पुणे के प्रसिद्ध और अत्यंत पूजनीय श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर को इस वर्ष विशेष रूप से पारंपरिक ‘दक्षिणात्य’ (साउथ इंडियन) शैली में भव्य रूप से सजाया गया। इस अनोखी और आकर्षक सजावट को देखने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। मंदिर परिसर को पूरे भव्य तरीके से फूलों की सजावट से सुसज्जित किया गया, जो बेस से लेकर शिखर तक फैली हुई थी। रंग-बिरंगे ताजे फूलों का उपयोग कर मंदिर को अत्यंत मनमोहक रूप दिया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

मंदिर के शिखर पर विशेष रूप से फूलों की सहायता से देवी-देवताओं की जटिल और सुंदर आकृतियां बनाई गईं। इन कलाकृतियों ने मंदिर की भव्यता को और बढ़ा दिया और श्रद्धालुओं को एक अद्भुत दृश्य अनुभव प्रदान किया। इसके अलावा मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गजराज (हाथी) का एक भव्य फूलों से बना डिजाइन भी आकर्षण का केंद्र रहा। यह डिजाइन न केवल परंपरा और सांस्कृतिक प्रतीक को दर्शा रहा था, बल्कि भक्तों के स्वागत में एक दिव्य संदेश भी दे रहा था।

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी को गणपति भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन दगडूशेठ गणपति मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि दर्शन सुचारू रूप से हो सकें। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। लोग भगवान गणेश के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना कर रहे थे। मंदिर में पूरे दिन भजन-कीर्तन और धार्मिक माहौल बना रहा।

मंदिर की इस विशेष सजावट ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बाहर से आए श्रद्धालुओं को भी आकर्षित किया। कई भक्तों ने इसे अब तक की सबसे सुंदर और कलात्मक सजावटों में से एक बताया। दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर अपनी भव्यता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। हर विशेष अवसर पर यहां की सजावट और आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। इस बार की साउथ इंडियन थीम पर आधारित सजावट ने मंदिर को एक अलग ही रूप दिया, जिसने भक्तों के मन में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव को और भी गहरा कर दिया।

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