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नंदन नीलेकणि ने AI को लेकर खारिज कर दिया है, कि यह तकनीक पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।


व्यापार 30 May 2026
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नंदन नीलेकणि ने AI को लेकर खारिज कर दिया है, कि यह तकनीक पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।

इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर उठ रही उन चिंताओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि यह तकनीक पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने साफ कहा कि AI के तेजी से विस्तार के बावजूद आईटी कंपनियां पहले से अधिक प्रासंगिक और जरूरी बनी हुई हैं। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के माध्यम से शेयरधारकों को संबोधित करते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि तकनीकी बदलाव हमेशा उद्योग के स्वरूप को बदलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा सेवाओं की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। उनके अनुसार, AI के आने से आईटी सेक्टर कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि उसके लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक सॉफ्टवेयर सिस्टम से AI आधारित तकनीकों की ओर हो रहा बदलाव टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर्स की भूमिका को कम नहीं करता, बल्कि उसे और विस्तारित करता है। इस परिवर्तन के साथ कंपनियों को नए तरह के समाधान, आधुनिक सिस्टम और अधिक जटिल डिजिटल जरूरतों को पूरा करने का अवसर मिल रहा है। नीलेकणि के मुताबिक, AI अब केवल एक तकनीक नहीं बल्कि बिजनेस के संचालन के तरीके को बदलने वाला बड़ा कारक बन चुका है। यह विभिन्न उद्योगों में कामकाज की प्रक्रिया को तेज, स्मार्ट और अधिक डेटा-आधारित बना रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में कंपनियां अब अपने सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे टेक्नोलॉजी मॉडर्नाइजेशन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आईटी सर्विस कंपनियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे इस बदलाव को लागू करने में मुख्य सहयोगी बनती हैं। इंफोसिस चेयरमैन ने जोर देकर कहा कि AI के कारण जॉब्स या कंपनियों के खत्म होने की धारणा सही नहीं है, बल्कि यह तकनीक नई तरह की क्षमताओं और सेवाओं की मांग पैदा कर रही है। इससे आईटी सेक्टर में नवाचार और विस्तार के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में आईटी कंपनियां केवल पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी सेवाओं में भी बड़ी भूमिका निभाएंगी। इस तरह नंदन नीलेकणि के बयान ने AI और आईटी इंडस्ट्री को लेकर चल रही बहस को एक नया दृष्टिकोण दिया है, जिसमें इसे खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

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