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अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले भारत समेत 60 देशों पर लग सकता है एक्स्ट्रा टैरिफ


व्यापार 03 June 2026
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अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले भारत समेत 60 देशों पर लग सकता है एक्स्ट्रा टैरिफ

नई दिल्ली, 03 जून । अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले भारत, चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे करीब 60 देशों को एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक्स्ट्रा टैरिफ का झटका दे सकती है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) ऑफिस ने इन साठ देशों से होने वाले आयात पर दो स्लैब में 10 प्रतिशत से लेकर 12.50 प्रतिशत तक का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। यूएसटीआर ऑफिस ने अपनी एक जांच के बाद निष्कर्ष निकला है कि ये सभी देश अपने यहां फोर्स्ड लेबर (बंधुआ या जबरन मजदूरी) के खिलाफ बनाए गए नियमों को कड़ाई से लागू करने या फोर्स्ड लेबर द्वारा बनाए गए उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाने में आंशिक अथवा पूरी तरह से नाकाम रहे हैं।

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस का मानना है कि फोर्स्ड लेबर को लेकर इन देशों के कमजोर नियम और ढीली-ढाली नीतियों के कारण उनके उत्पाद तुलनात्मक तौर पर सस्ते होते हैं, जिससे अमेरिकी वर्कफोर्स को ट्रेड के लिए बराबरी का मौका नहीं मिल पाता है। इसी वजह से यूएसटीआर ऑफिस ने अपनी जांच में दोषी पाए गए भारत समेत दुनिया के 60 देशों के खिलाफ अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है।

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस की ओर से कहा गया है कि अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा फोर्स्ड लेबर द्वारा बनाए गए सामानों के आयात पर रोक ना लगाने की बात को किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं किया जा सकता है। इसकी वजह से अमेरिकी वर्कफोर्स को ग्लोबल लेवल पर अनइक्वल मार्केट (असामान बाजार) में कंपीट करना पड़ता है। इस स्थिति को खत्म करने के लिए ऐसे देश पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाना जरूरी है।

इस बयान में यह भी कहा गया है कि फोर्स्ड लेबर के इस्तेमाल से इन देशों की कंपनियां काफी कम लागत पर समान बना लेती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कंपिटीशन बढ़ जाता है और उत्पादों की कीमत गिर जाती है। इससे अमेरिकी उत्पादकों को भी अपने उत्पादों को कम कीमत पर बेचने के लिए विवश होना पड़ता है। ऐसा होना विश्व व्यापार के नियमों का भी उल्लंघन है, क्योंकि विश्व व्यापार के नियमों में सभी प्लेयर्स के लिए इक्वल प्लेइंग फील्ड होने की बात सिद्धांत रूप में स्वीकार की गई है।

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने के प्रस्ताव में सभी साठ देशों को दो अलग-अलग टैरिफ स्लैब में डाला है। पहला स्लैब 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ का है। ये स्लैब उन देशों के लिए है, जहां फोर्स्ड लेबर से जुड़े आयात पर पूर्ण या आंशिक रूप से कानूनी रोक लगाई गई है, लेकिन वहां कानूनी रोक का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। वहीं दूसरा स्लैब 12.50 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ का है। इस स्लैब का प्रस्ताव उन देशों के लिए है, जहां फोर्स्ड लेबर को रोकने के लिए कोई कानूनी तरीका या प्रतिबंधात्मक ढांचा बनाया या लागू ही नहीं किया गया है। भारत को अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस में इसी श्रेणी में शामिल किया है।

अमेरिका इन 60 देशों से ही लगभग 99 प्रतिशत आयात करता है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने 12 मार्च 2026 को फोर्स्ड लेबर को लेकर जांच की शुरुआत की थी। इस जांच में चीन, भारत और जापान समेत दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, वियतनाम, ब्रिटेन और खाड़ी के कई देशों को शामिल किया गया था। इनमें से 54 देश कानून बनाने और उन्हें कड़ाई से लागू करने दोनों मोर्चे पर असफल पाए गए। इनके अलावा कनाडा, इंडोनेशिया, इक्वाडोर और पाकिस्तान समेत छह देशों को कानून को कड़ाई से लागू नहीं करने का दोषी पाया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 का इस्तेमाल अपने पहले कार्यकाल में भी कर चुके हैं। अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने इस कानून का इस्तेमाल चीनी के आयात पर भारी भरकम टैरिफ लगाने के लिए किया था। इस कानून के तहत अमेरिका ने अपने पास ये अधिकार सुरक्षित रखा है कि अगर कोई देश अमेरिका के वाणिज्यिक हितों को प्रभावित करता है, तो अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिका जवाबी टैरिफ लगाने का कदम उठा सकता है।

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