मीरपुर/रावलाकोट (इस्लामाबाद), 09 जून । पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा में प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ते तनाव के बीच प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सशस्त्र कार्यकर्ताओं और कानून प्रवर्तन एजेन्सी (एलईए) के बीच सोमवार को रावलाकोट में हुई हिंसक झड़प में 12 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 8 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सेना और खासतौर पर सेना प्रमुख आसिम मुनीर से नाराज थे और आसिम मुनीर दहशतगर्द है के नारे लगा रहे थे।
पुंछ के आयुक्त सरदार वहीद खान ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में कुल 12 लोगों की जान गई, जबकि दर्जनों सुरक्षा अधिकारी घायल हुए हैं। उनके अनुसार, प्रतिबंधित संगठन के सशस्त्र सदस्यों ने आधुनिक हथियारों से लैस होकर सुरक्षा बलों पर हमला किया और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और उपद्रवी तत्वों से दूरी बनाए रखने की अपील की। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, अधिकांश राजमार्ग यातायात के लिए खोल दिए गए हैं और बाजार तथा व्यावसायिक केंद्र सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
आज़ाद जम्मू-कश्मीर (एजेके) पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, गोलीबारी में 4 सुरक्षाकर्मी मारे गए जबकि 20 से अधिक पुलिस और सुरक्षा अधिकारी घायल हुए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एजेके सरकार ने 9 जून को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले जेएएसी को आतंकवाद-निरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।
जेएएसी पहले भी आर्थिक मुद्दों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित करता रहा है। मई 2024 और सितंबर 2025 में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान भी सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में लोगों की मौत हुई थी। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के हिंसक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और अशांति फैलाने वालों को जल्द कानून के कटघरे में लाया जाएगा। जनता से भी अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित संगठन या उसके सहयोगियों द्वारा आयोजित गतिविधियों में भाग न लें और केवल सरकारी स्रोतों से जारी जानकारी पर भरोसा करें।
पाकिस्तान में संसदीय मामलों के संघीय मंत्री तारिया फ़ज़ल चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा अधिकांश मांगें स्वीकार किए जाने के बावजूद यह समूह क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहबाज़ शरीफ़ के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी, जिसने समूह से वार्ता की और समझौते के अधिकांश बिंदुओं को लागू किया। मीरपुर डिवीजन में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन से कथित संबंध रखने वाले 91 लोगों को गिरफ्तार किया है। कामरान अली ने बताया कि गिरफ्तार लोगों के पास से हथियार, डंडे और अन्य सामग्री बरामद की गई है।
मीडिया रिपाेर्टस के अनुसार, यह हिंसा उस समय भड़की जब पीओके के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा में आरक्षित 12 सीटें संवैधानिक रूप से संरक्षित हैं और इन्हें संवैधानिक संशोधन के बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। यह फैसला जेएएसी द्वारा 9 जून को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले आया है। संगठन लंबे समय से शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करने और स्थानीय लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहा है। संगठन का आरोप है कि शरणार्थियों का राजनीतिक प्रभाव आवश्यकता से अधिक है।
वहीं, जेएएसी नेता शौकत नवाज मीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने रावलकोट में "नरसंहार" शुरू कर दिया है। उन्होंने समर्थकों से 9 जून की प्रस्तावित रैली में शामिल होने की अपील की थी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन में रहने वाले कुछ प्रवासी कश्मीरी समूहों और कुछ ब्रिटिश सांसदों की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान और एजेके के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी को कानून तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। विदेश कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, अस्पतालों जैसी सेवाओं में बाधा डालना और निर्दोष नागरिकों व सुरक्षा कर्मियों की हत्या किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार काे प्रेसवार्ता के दाैरान एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि हम पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का एक सिलसिला लगातार देख रहे हैं। यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा-पूर्ण प्रयास है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।







