सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई। यह पिछले 15 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले अप्रैल में यह दर 3.48% दर्ज की गई थी। महंगाई में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की कीमतों में आया उछाल बताया जा रहा है, जो वेस्ट एशिया में जारी तनाव और सप्लाई बाधाओं से भी प्रभावित हुआ। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई के अनुसार, मई में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 4.8% हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.2% थी। सब्जियों, अंडों और डेयरी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी ने इस उछाल में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से टमाटर की कीमतों में भारी वृद्धि देखी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 48.43% अधिक रही।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी महंगाई पर सीधा असर डाला। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में वृद्धि के कारण परिवहन महंगाई दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, मई में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की महंगाई 176 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 1.8% पर पहुंच गई। इसके अलावा, एलपीजी की कीमतों में हल्की कमी के बावजूद रेस्टोरेंट और आवास सेवाओं की महंगाई दर 154 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 5.7% हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.2% थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि दैनिक उपभोग से जुड़ी सेवाओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पर्सनल केयर कैटेगरी में भी महंगाई का असर देखने को मिला है, जहां लगभग 80 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि दर्ज की गई है। State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि मई की महंगाई दर में वृद्धि का प्रमुख कारण ईंधन की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। कुल मिलाकर, मई में महंगाई में आई यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ाने वाली है, खासकर खाद्य पदार्थों और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी के कारण। सरकार और नीति निर्माता आने वाले महीनों में कीमतों को नियंत्रित करने और सप्लाई को स्थिर रखने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।







