गुजरात के गांधीनगर में 15 से 18 सितंबर तक होगा आयोजन, उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों होने की संभावना
नई दिल्ली, 14 जून । वैश्विक चुनौतियों और संसाधन संकट के इस दौर में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच' के 10वें संस्करण की मेजबानी भारत करेगा। इसका आयोजन पहली बार भारत में किया जा रहा है।
गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 15 से 18 सितंबर तक होने वाले वैश्विक आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों होने की संभावना है। इसमें अनेक वैश्विक नेताओं विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के नेताओं के आने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन का मुख्य उद्देश्य वर्तमान के अशांत और चुनौतीपूर्ण समय में खुशहाली, समृद्धि और लचीलेपन को सुरक्षित करने के लिए बेहतरीन चक्रीय समाधानों को प्रदर्शित करना है। डब्ल्यूसीईएफ-2026 का आयोजन फिनलैंड के इनोवेशन फंड 'सिट्रा' और भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसे केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है और यह गुजरात सरकार के समन्वय के साथ-साथ वैश्विक और भारतीय भागीदारों के सहयोग से संपन्न होगा।
'सिट्रा' के वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था कार्यक्रम के निदेशक कारी हरलेवी ने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "पश्चिमी देशों और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) दोनों ही जगह नीति निर्माताओं के लिए संसाधनों की पर्याप्तता एक बड़ी चिंता बन गई है। वैश्विक संघर्षों के बीच दुनिया के कई हिस्सों में रहने की लागत (महंगाई) बढ़ रही है। दूसरी ओर, हमारी मौजूदा 'लीनियर इकोनॉमी' यानी - बनाओ, इस्तेमाल करो और फेंको वाली व्यवस्था भारी मात्रा में संसाधनों को बर्बाद कर रही है।"
डब्ल्यूसीईएफ की सहयोगी संस्था डच फाउंडेशन 'सर्किल इकोनॉमी' के हालिया आंकड़ों के अनुसार, संसाधनों के सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने और नष्ट होने वाली इस रैखिक (लीनियर) अर्थव्यवस्था के कारण दुनिया को हर साल लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसका मुख्य विषय "चक्रीय अर्थव्यवस्था: लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन" रखा गया है। इसका उद्देश्य दुनिया भर के समुदायों और व्यवसायों को एक सफल भविष्य के निर्माण के लिए एक साथ लाना है। इस दिशा में भारत अपने 'मिशन लाइफ' (पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली) अभियान के जरिए पहले से ही विश्व का नेतृत्व कर रहा है। यह अभियान पर्यावरण की रक्षा के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर बदलाव लाने का एक वैश्विक जन-आंदोलन है।
इसके अलावा भारत 3 आर (रिड्यूस यानी कम करना, रियूज़- पुन: उपयोग करना, रीसाइकल- पुनर्चक्रण) और स्वच्छ भारत अभियान जैसी पहलों के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा दे रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस फोरम के शुरुआती दो दिन मुख्य मंच के सत्रों के नाम होंगे, जिनकी रूपरेखा सह-मेजबान और साझेदार मिलकर तैयार करेंगे। आखिरी के दो दिन 'एक्सेलेरेटर सत्रों' के लिए समर्पित होंगे। इसके साथ ही भारत और दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ चक्रीय समाधानों को प्रदर्शित करने के लिए एक विशाल प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।
इस वर्ष पहली बार एक्सेलेरेटर सत्रों और एक्सपो क्षेत्र दोनों के लिए एक 'ओपन कॉल' (खुला आमंत्रण) शुरू किया गया है। एक्सेलेरेटर सत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि एक्सपो की मेजबानी के लिए आवेदन जून के अंत में शुरू होने की उम्मीद है। यह मंच वैश्विक स्तर पर भारत को चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक अग्रणी नेता के रूप में स्थापित करने का काम करेगा।
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दक्षिण एशिया में पहले 'विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच' की भारत करेगा मेजबानी
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