महाराष्ट्र मुंबई 15 जून: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स ने 2026 की शुरुआत में तेज़ रफ्तार पकड़ ली है। एक हालिया स्टडी में सामने आया है कि पहले 90 दिनों में ही लगभग 70 डेवलपर एग्रीमेंट (DA) साइन किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष 2025 में हुए कुल एग्रीमेंट का 30 प्रतिशत से अधिक है। मुंबई में रीडेवलपमेंट अब आवासीय विकास का सबसे बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुराने भवनों के पुनर्विकास से शहर में आवास आपूर्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
स्टडी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज़ हो सकता है। अनुमान है कि रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए वर्ष 2031 तक मुंबई में लगभग 59,000 नए घर तैयार किए जा सकते हैं। इन नए आवासों का कुल बाजार मूल्य करीब 1,500 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोसाइटी रीडेवलपमेंट परियोजनाएं न केवल आवास संकट को कम करेंगी, बल्कि सरकारी राजस्व में भी बड़ा योगदान देंगी। अनुमान है कि इन प्रोजेक्ट्स से पूरे कार्यकाल के दौरान स्टैम्प ड्यूटी के रूप में 9,115 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में जमीन की सीमित उपलब्धता के कारण रीडेवलपमेंट ही भविष्य का प्रमुख समाधान है। पुराने और जर्जर भवनों को हटाकर आधुनिक इमारतों का निर्माण न केवल सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, बल्कि यह शहर की आवासीय क्षमता को भी बढ़ाता है। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों के अनुसार, डेवलपर्स और सोसाइटीज के बीच बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि रीडेवलपमेंट मॉडल अब अधिक संगठित और तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, नाइट फ्रैंक इंडिया की इस स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई में आने वाले वर्षों में रीडेवलपमेंट न केवल रियल एस्टेट विकास का मुख्य आधार बनेगा, बल्कि शहर की आर्थिक और आवासीय संरचना को भी नए स्तर पर ले जाएगा।







