मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ लाने का प्रमुख उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी फंड की निगरानी करना और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन विदेशी योगदान को भारत में लाकर उसका इस्तेमाल कथित तौर पर देश-विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं।
दक्षिण-एशियाई और प्रवासी पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी चंदे से जुड़े नियमों को मजबूत करने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि कुछ संगठन लगातार FCRA के जरिए विदेशों से धन प्राप्त कर रहे हैं और उस धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य ऐसे संगठनों को रोकना है जो विदेशी धन का गलत इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो संगठन नियमों के तहत वैध और सामाजिक हित से जुड़े काम कर रहे हैं, उनके लिए प्रस्तावित कानून किसी तरह की अनावश्यक बाधा पैदा नहीं करेगा। विदेशी फंड की निगरानी पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी योगदान के भारत में आने और उसके इस्तेमाल पर निगरानी जरूरी है। उनके मुताबिक, FCRA के तहत मिलने वाले विदेशी धन का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका इस्तेमाल कानून के अनुरूप ही हो।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान ऐसे फंड के प्रवाह पर है, जिसके जरिए किसी संगठन या संस्था की गतिविधियों को विदेशी वित्तीय सहायता मिलती है। यदि इस धन का इस्तेमाल देश के हितों के खिलाफ किया जाता है, तो सरकार के लिए उस पर कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है। फडणवीस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “FCRA पर बिल लाने की वजह यह है कि कुछ संगठन लगातार FCRA का इस्तेमाल करके देश में पैसा ला रहे हैं और उस पैसे का इस्तेमाल देश-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।”
हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने बयान में किसी विशेष संगठन का नाम नहीं लिया। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी इस बयान से नहीं होती। अच्छे काम करने वाले संगठनों को राहत का दावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य सभी गैर-सरकारी संगठनों या विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए मुश्किलें खड़ी करना नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन नियमों का पालन करते हुए समाज के लिए सकारात्मक और वैध गतिविधियां चला रहे हैं, उन्हें नए कानून से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
फडणवीस ने कहा, “जो लोग अच्छा काम कर रहे हैं, उनके लिए इस बिल में कोई रुकावट या मुश्किल नहीं है।” उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि सरकार विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच उन संगठनों पर विशेष ध्यान देना चाहती है, जिनकी गतिविधियों या फंड के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा या कानूनी चिंताएं सामने आती हैं। FCRA के तहत विदेशी योगदान का नियमन FCRA भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले योगदान को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से प्राप्त धन का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी और सामाजिक उद्देश्यों के अनुरूप हो। विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली पात्र संस्थाओं को कानून के तहत निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।
सरकार समय-समय पर ऐसी संस्थाओं के पंजीकरण, अनुपालन और विदेशी फंड के इस्तेमाल की निगरानी करती है। विदेशी फंड से जुड़े नियमों का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय पारदर्शिता से भी है। सरकार का तर्क रहा है कि विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय दुरुपयोग को रोका जा सके। सुरक्षा और नागरिक समाज के बीच संतुलन की चुनौती FCRA में किसी भी तरह के बदलाव के साथ सरकार के सामने दोहरी चुनौती रहती है।
एक ओर विदेशी धन के गलत इस्तेमाल और संभावित गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले वैध संगठनों को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं से बचाना भी महत्वपूर्ण है। कई गैर-सरकारी संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे संगठनों के लिए विदेशी योगदान कई बार उनके कार्यक्रमों के वित्तपोषण का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। इसी कारण विदेशी फंड के नियमन से जुड़े किसी भी नए प्रावधान का असर व्यापक नागरिक समाज क्षेत्र पर पड़ सकता है।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि नए नियमों के तहत किन गतिविधियों को अधिक निगरानी के दायरे में रखा जाएगा और वैध संगठनों के लिए अनुपालन प्रक्रिया किस तरह सरल रखी जाएगी। प्रस्तावित बिल पर आगे बढ़ेगी चर्चा मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब विदेशी योगदान और उसके नियमन को लेकर केंद्र स्तर पर कानूनी ढांचे में बदलाव की चर्चा है। ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ के जरिए सरकार विदेशी फंड की निगरानी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, बिल के विस्तृत प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों को लेकर आगे की संसदीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। किसी भी संशोधन के बाद विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नए अनुपालन मानक लागू हो सकते हैं।
फडणवीस का संदेश स्पष्ट देवेंद्र फडणवीस ने अपने बयान में सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि विदेशी फंड के नाम पर देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कानून का उद्देश्य सभी संगठनों को निशाना बनाना नहीं है। अब इस प्रस्तावित संशोधन पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज होने की संभावना है।







