मुंबई 08 सितंबर। महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) की उस मांग का समर्थन किया है, जिसमें गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की एंट्री रोकने की बात कही गई है। नितेश राणे ने सोमवार को कहा कि ऐसे आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रमों में प्रवेश से पहले हनुमान चालीसा का पाठ कराया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई है।
VHP की मांग का किया समर्थन विश्व हिंदू परिषद की ओर से हाल ही में नवरात्रि के गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में प्रवेश को लेकर मांग उठाई गई थी। संगठन का कहना है कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनाए रखने के लिए आयोजकों को आने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करनी चाहिए। मंत्री नितेश राणे ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा और पहचान की जांच जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे आयोजनों में कुछ लोग गलत इरादों से शामिल हो सकते हैं।
‘लव जिहाद’ का लगाया आरोप नितेश राणे ने अपने बयान में ‘लव जिहाद’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान ऐसे मामले बढ़ जाते हैं। ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा उस आरोप के लिए किया जाता है, जिसमें मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं को कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने का आरोप लगाया जाता है। हालांकि, इस शब्द को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। कई लोग इसे एक विवादित शब्द मानते हैं।
आयोजकों से पहचान जांच की अपील भाजपा नेता ने कहा कि गरबा और डांडिया आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान की जांच करना आयोजकों की जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। हनुमान चालीसा पाठ वाले बयान पर चर्चा नितेश राणे के हनुमान चालीसा पाठ वाले बयान ने भी राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में आने वालों की आस्था और पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
उनके इस बयान पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। नवरात्रि आयोजनों में सुरक्षा का मुद्दा नवरात्रि के दौरान महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवा और परिवार शामिल होते हैं। आयोजक आमतौर पर सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश पास और भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग उपाय अपनाते हैं। कई जगहों पर पहचान पत्र की जांच भी की जाती है। राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना नितेश राणे के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह मुद्दा गर्म हो सकता है। विपक्ष पहले भी भाजपा नेताओं के ऐसे बयानों को लेकर सवाल उठाता रहा है और इसे धार्मिक आधार पर विभाजन की राजनीति से जोड़ता रहा है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और पहचान सुनिश्चित करना गलत नहीं है। धार्मिक आयोजनों और सामाजिक बहस के बीच संतुलन गरबा और डांडिया जैसे कार्यक्रम सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या में अलग-अलग समुदायों के लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और आयोजकों की जिम्मेदारी होती है। हालांकि, प्रवेश को लेकर किसी समुदाय विशेष पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर बहस भी होती रही है।







